शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

ग्वार चोबीस घंटे में पांचसो की तेजी

ग्वार की अचानक आई तेजी ने हेरान कर दिया चोबीस घंटे में पांचसो की तेजी ये क्या हो रहा है ?ऐसे तो हो गया ग्वार का कारोबार- लोगो का मन हट रहा है ग्वार के वायदा व्यापर से !वायदा में सटे बाजी का कितना जोर है ये नमूना है बच के रहिये और किसी दूसरी तरफ ध्यान दीजिये !डिमांड सप्लाई का मामला नही फसल सर पर खड़ी है विदेसी मांग शुरू से अच्छी है पर ऐसा भी नही की एका एक कुछ नया हो गया हो लुटने से अच्छा दुरी बनाये रखने में ही सर है !

शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

चने में तेजड़ियों को धराशाई कर दिया

गुआर की बिजाई अच्छी होने के बाद अभी तीन चार दिन से गर्म हवाओं से फसल को कुछ नुकसान हुआ है पर अभी कोई ज्यादा नुकसान नही है एग्री वायदा बाजार में सभी जिंसो में मंदी आई है इस मंदी का कारनामा शुरू हुआ चने वायदा से !चने में लगातार चार निचे के सर्किट लगे और इसकी शुरुआत हुई लिवाल पर मार्जिन लगाने सेऔर  उस पर दुसरे दिन राजस्थान सरकार ने स्टाक लिमिट चने की आधी करदी  जिसने तेजड़ियों  को धराशाई कर दिया इस तरह की मंदी पहले कभी देखने को नही मिली !जिस चने की सोर्टेज बताई जा रही थी उसीको बम्पर बना दिया यानि सारा खेल सटोरियों का ही था !इसी तरह गुआर का क्या करेंगे ये भी वक्त ही बतायेगा अभी तो गुआर में रोजाना बड़ी घट बढ़ हो रही है पता नही चने की तरह किस के गले में घंटी बांधेगे

रविवार, 25 सितंबर 2011

राजस्थान में गुआर की बिजाई२७५० लाख हेक्टर में

गुआर की बिजाई पूरी हो चुकी है इस बार राजस्थान में २७५० लाख हेक्टर में गुआर की बिजाई हुई है जो लछ्य से ५० लाख हेक्टर ज्यादा है पर पिछले साल की ३००० लाख हेक्टर की बुवाई से कम ही है अच्छी समय पर हुई बरसात और धूप ने फसल को जोरदार बना रखा है इस बार व्यापारिक अनुमानों के अनुसार १ करोड़ ५० लाख बोरी की पैदावार पुरे भारत मै आने की उमीद है ऐसे में इसकी तेजी मंदी आने वाली गम की विदेशी मांग पर निर्भर करेगी पिछले २०१० /२०११ की तरह यदि मांग रहती है तो इसमें मंदी नही है पर मांग मै जरा सी भी सुस्ती रही तो एक बार इन ऊँचे भावों से बाजार धड़ाम कर के गिर सकते है तो सभी विकल्प खुले रखते हुए आने वाले समय का इंतजार करके ही मानसिकता बनानी चाहिए और सटोरिये क्या सोच रहे है इसकी थाह लेते रहनी चाहिए  
      

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

ग्वार क्या महत्व रह गया है किसी विश्लेसन का

पिछले दिनों वायदा के बारे में प्रकाशित मेरे लेख को ब्लाग पर डाल दिया है !ग्वार की तेजी मंदी के बारे में अपने विचारों को रोके रखा लिखा नही ये ठीक ही रहा !मेरा मन ग्वार की फसल और डिमांड की तरफ ही ज्यादा रहा और उससे तेजी नही बन रही थी पर गत समय की तेजड़ियों और उनके विपरीत लोगो की कसरत देखे तो दोनों और से आरोप प्रत्यारोप मिडिया में लगे की फसल पर नियन्त्रण करने के प्रयास में बड़ी कम्पनिया लग गई है जाहिर है राजनेतिक जोर आजमेईस भी हुई, मार्जिन भी लगा ,भाव भी बढ़े ,लगातार भाव तेज भी हो रहे है ,फसल पर भी कब्जा हुआ है ,इन सब बातो के बाद क्या महत्व रह गया है किसी विश्लेसन  का ? पुराणी बात याद आगई (करो बेटा फाटका ना घर का रहे ना घाट  का )धोबी के कुते वाली बात हो गई !आगे बाजार देख रहे है ऊंट किस करवट बेठेगा !