शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014

कृषि वायदा हर जिंस में असामान्य तेजी मंदी

कृषि वायदा की लगभग हर जिंस में असामान्य तेजी मंदी आरही है ! हर तरफ परेशानी का आलम है पत्ता नही क्यों एक्सचेंजों को फ़िक्र नही है ? या फिर जान बूझकर आँख बंद कर रखी है ? या सिर्फ बड़े लोगों को स्पोर्ट करने का ही सोच रखा है ? अगर ऐसा नही है तो क्यों सभी मसालों के भाव बढ़ाये जा रहे है ? क्यों चना ,तेल ,अरंडा आदि के भाव रोजाना तेज किये जा रहे है ? लगता है जैसे सब कुछ निरंकुश हो गया है ! मोदी सरकार का खौफ इतने दिन ही था क्या ? हाजिर से पूरा ताल मेल खत्म ! उदाहरण के लिए हाजिर अरंडा 4500 रूपये और 25 दिन बाद का अरंडा 5300 रूपये ! लगता नही की कंहा घालमेल हो रहा है और करोड़ो के वारे न्यारे ? 

सोमवार, 22 दिसंबर 2014

पिंच कर पानी निकाल दिया अरंडा और धनिया में

अरंडा और धनिया में वायदा बाजार आयोग ने अतिरिक्त मार्जिन लगा दिया है ! मार्जिन लगने का असर उल्टा हुआ दोनों बाजार मंदे  होने के बजाय  तेज बंद हुए ! यह है ताकत का प्रदर्शन ! लगता है बिकवाल खुदरा लोग है और लिवाल बूल ! अरंडा तो वायदा से हाजिर बाजार में 550 रूपये क्विंटल निचा बिक रहा है पर सट्टे की ताकत अलग है - यह नकारखाना है- इसमें तूती की आवाज कंहा सुनाई देगी ? राजस्थानी में कहावत है "पिंच कर पानी निकाल दिया "कहावत के अनुसार ही खुदरा कारोबारियों का यही हाल मलाल है ! धरातल पर आकर कारोबारी की टोह ले तो हकीकत सामने आजायेगी !अब मुर्गी हलाल होने को है फिर अंडा कौन देगा ! एक गजल का शेर याद आता है -ख्वाब देखे थे सुहाने क्या क्या , लूट गए अपने खजाने क्या क्या ! 

मंगलवार, 16 दिसंबर 2014

ग्वार की शादी क्रूड के साथ हो गई है

ग्वार की शादी क्रूड के साथ हो गई है !ग्वार मे आई मंदी को क्रूड की मंदी के साथ जोड़ा जा रहा है ! ग्वार लगातार घटता जा रहा है लगातार मंदी से ग्वार के प्रति व्यापार का रुझान घटा है !आवक पिछले महीने 1 लाख बोरी से ऊपर चल रही थी जो अब घटकर 50 हजार बोरी के लगभग रह गई है ! घटते भावों से विदेशी ग्राहक भी लिवाली में कमजोरी दिखा रहे है ! स्टाकिस्ट लिक्विडिटी में कमजोरी बता रहे है !कूल मिलाकर सभी चीजो की मंदी के साथ ग्वार भी मंदी की चपेट में है (मसालों को छोड़कर ) !नमो सरकार निहाल है खाद्य वस्तुओं की मंहगाई दर लगातार गिर रही है ! अब किसान को खेती में 50 फीसदी मुनाफा कैसे पहुंचाएंगे ?चना, मूंगफली तो समर्थन मूल्यों से निचे बिक रहे है रहा - सहा ग्वार भी खाल खिंचेगा ! आओ अब तो मंहगाई मंहगाई चिलाना छोड़े !